WHO ने चेताया, अपने सबसे खतरनाक फेज में कोरोना वायरस

नई दिल्ली. कोरोना वायरस का संक्रमण (Covid-19 infection) 87 लाख का आंकड़ा पार कर चुका है। भारत में भी ये आंकड़ा दर हफ्ते में तेजी से बढ़ता ही जा रहा है। आपको बता दें कि पिछले 24 घंटों में ही संक्रमण के लगभग 15 हजार मामले आये हैं। अब WHO ने एक बार फिर से चेतावनी दी है कि वायरस ज्यादा खतरनाक फेज में जा चुका है और अबकी बार हालात पहले दौर से भी गंभीर होंगे।

आपको बता दें कि वैज्ञानिक पहले से ही वायरस के दूसरे चरण की बात करते आए हैं। हाल ही में ये देखा गया कि वायरस के स्पाइक्स कई गुना तक बढ़े हैं, जिसकी वजह से वो लगभग 10 गुना खतरनाक हो चुका है। म्यूटेशन से गुजरकर खतरनाक हो चुका वायरस अब आसानी से बड़ी आबादी को प्रभावित कर सकता है, जो लॉकडाउन में ढील के कारण घरों से बाहर है।

WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस अधानोम गेब्रेयेसस ने शुक्रवार को कहा कि हम नए और खतरनाक चरण में पहुंच चुके हैं। जिनेवा में वर्चुअल प्रेस वार्ता करते हुए उन्होंने ये चेतावनी दी। इसका आधार गुरुवार को चौबीस घंटों के भीतर आए आंकड़े थे। एक ही दिन में डेढ़ लाख से ज्यादा का ये आंकड़ा पहली बार आया है, जिनमें से आधे से ज्यादा मामले अमेरिका से हैं। इसके अलावा एशिया और मिडिल ईस्ट से भी काफी केस आ रहे हैं।

दूसरी ओर काफी समय से सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को खोलने के लिए कई देश बेताब हैं। यहां कि यूरोप में कई देशों ने बबल ट्रैवल शुरू कर दिया है। इसके तहत अपेक्षाकृत सुरक्षित देशों के लोग एक से दूसरे देश यात्रा कर सकते हैं। अमेरिका में भी अब आंशिक स्तर पर ही लॉकडाउन है, जबकि खुद भारत में काफी कुछ खुल चुका है। इसे ही WHO संक्रमण बढ़ने की वजह बता रहा है।

टेड्रोस ने साल 1918 में फैले स्पेनिश फ्लू से इसकी तुलना करते हुए कहा कि वो बीमारी एक के बाद एक तीन बार लौटी थी। जैसे ही लोग असावधान होंगे, कोरोना का घटता कहर फिर लौटेगा और ज्यादा प्रभावी होकर लौटेगा। महामारियां वैसे तो अलग-अलग पैथोजन्स से हो सकती हैं, उनके लक्षण और असर भी अलग होते हैं लेकिन लौटने के मामले में कई महामारियां एक तरह की दिखीं।
स्पेनिश फ्लू के अलावा साल 1957 और 1968 में जो फ्लू फैले, वे सब कई लहरों में आए। साल 2009 में जब चिकित्सा सुविधाएं इतनी आधुनिक हो चुकी थीं, तब भी अमेरिका में H1N1 इंफ्लूएंजा आया। इसकी पहली लहर अप्रैल में दिखी तो दूसरी कुछ महीने बाद लौटी। वायरस क्यों लौटकर आता है। इस पर फिलहाल स्टडी की जा रही है। इसमें बीमारी से बचाव के अलावा सोशल फैक्टर भी काम करता है और ये भी कि कितने लोगों में बीमारी का पहला हमला हो चुका है। लंदन के Imperial College में भी कोरोना पर रिस्पॉन्स टीम ने अनुसार कोरोना भी चरणों में आ सकता है, जैसे दूसरी महामारियां आई थीं।

आखिर क्यों लौटती है बीमारी : अब तक इस बात पर पूरी जानकारी नहीं मिल सकी है कि वायरण चरणों में कैसे लौटता है। वैसे माना जा रहा है कि वायरस कब लौटेगा, इसमें एंटीबॉडी भी एक अहम भूमिका निभा सकती है। जैसे अगर वायरस का पहला हमला झेल चुके शख्स के शरीर में एंडीबॉडी लंबे वक्त तक असरदार रही तो वायरस का अटैक तभी दिखेगा जब ये कमजोर पड़ जाए।

अगर इसका असर खत्म होने में 2 साल लगें तो ये दो साल बाद लौटेगा। अगर सालभर या कुछ महीनों में ही कोविड-19 के खिलाफ एंटीबॉडी कमजोर पड़ जाए, जैसा कि मौसमी फ्लू के मामले में दिखता है तो कोरोना का अगला हमला कुछ ही महीनों में दोबारा हो सकता है।

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